*रेल सुरक्षा रिकॉर्ड सुधार में वृद्धि : वार्षिक दुर्घटनाएं 2004-14 के औसत 171 से घटकर 2025-26 में अब तक 11 रह गई हैं*
अन्य खबरे Dec 12, 2025 at 05:55 PM , 156लखनऊ।
भारतीय रेल में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। किसी भी असामान्य घटना की रेलवे प्रशासन द्वारा गहन जांच की जाती है। तकनीकी कारणों के अलावा किसी अन्य कारण की आशंका होने पर राज्य पुलिस की सहायता ली जाती है।
कुछ मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से भी मार्गदर्शन लिया जाता है। हालांकि, जांच का प्राथमिक माध्यम राज्य पुलिस ही है। यह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है। इसके अंतर्गत आपराधिक गतिविधियों की जांच, कानून व्यवस्था बनाए रखना और पटरियों, पुलों, सुरंगों आदि रेलवे के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
वर्ष 2023 और 2024 में रेलवे ट्रैक से छेड़छाड़/तोड़फोड़ की सभी घटनाओं में, राज्यों की पुलिस/जीआरपी और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा मामले दर्ज किए गए। इसके बाद जांच, अपराधियों की गिरफ्तारी की गई और उन पर मुकदमा चलाया गया।
रेलवे द्वारा राज्य पुलिस/जीआरपी के साथ बेहतर समन्वय, ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए समन्वित कार्रवाई और निगरानी के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों और असुरक्षित इलाकों में रेलकर्मियों, रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ), जीआरपी और सिविल पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से लगातार गश्त की जा रही है।
उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों, असुरक्षित इलाकों में गश्त करने और खतरों को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने हेतु विशेष दल गठित किए गए हैं।
रेलवे पटरियों के पास पड़ी सामग्री को हटाने के लिए नियमित अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका उपयोग शरारती तत्व रेलवे ट्रैक पर रखकर अवरोध उत्पन्न करने के लिए कर सकते हैं।
रेलवे ट्रैक के पास रहने वाले लोगों को ट्रैक पर अवांछित सामग्री रखने, रेल घटकों को हटाने के बाद होने वाली संभावित घटनाओं के परिणामों के बारे में जागरूक किया जा रहा है और उनसे सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने का अनुरोध किया जा रहा है।
रेलवे राज्य स्तरीय सुरक्षा समिति (एसएलएससीआर) की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इनका गठन प्रत्येक राज्य में सम्बंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस महानिदेशक/पुलिस आयुक्त की अध्यक्षता में किया गया है। इसमें रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ), जीआरपी और खुफिया इकाइयों के प्रतिनिधि शामिल हैं। अपराध पर नियंत्रण, मामलों के पंजीकरण, उनकी जांच और रेलवे परिसर के साथ-साथ चलती ट्रेनों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आरपीएफ द्वारा राज्य पुलिस/जीआरपी अधिकारियों के साथ सभी स्तरों पर सक्रिय रूप से घनिष्ठ संपर्क स्थापित किया जाता है। इसमें तोड़फोड़ की घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है और खुफिया जानकारी साझा की जाती है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। उपरोक्त के अलावा, स्थिति के अनुसार एनआईए और सीबीआई जैसी विशेष एजेंसियां भी शामिल हैं।
केंद्रीय और राज्य खुफिया एजेंसियों के अलावा, आरपीएफ की खुफिया इकाइयां, यानी सीआईबी और एसआईबी को नियमित रूप से जागरूक किया जाता है और उन्हें निर्देश दिए जाते हैं कि वे खुफिया जानकारी एकत्र करें और पुलिस अधिकारियों के समन्वय से तोड़फोड़ के प्रयासों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें।
ट्रेन संचालन में सुरक्षा सुधारने के लिए भारतीय रेल द्वारा कई उपाय किए गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में उठाए गए विभिन्न सुरक्षा उपायों के परिणामस्वरूप, दुर्घटनाओं की संख्या में भारी कमी आई है। नीचे दिए गए ग्राफ में दर्शाए अनुसार, परिणामी ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 2014-15 में 135 से घटकर 2024-25 में 31 हो गई है।
गौरतलब है कि 2004-14 की अवधि के दौरान परिणामी रेल दुर्घटनाओं की संख्या 1711 थी (औसतन 171 प्रति वर्ष), जो 2024-25 में घटकर 31 और 2025-26 में (नवंबर 2025 तक) और भी घटकर 11 रह गई।मानव त्रुटियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से भारतीय रेल ने सुरक्षा उपायों को व्यापक रूप से मजबूत किया है। 31 अक्टूबर 2025 तक 6,656 स्टेशनों पर बिंदुओं और संकेतों के केंद्रीकृत संचालन के साथ विद्युत/इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित की गई है, जबकि 10,098 लेवल क्रॉसिंग गेट इंटरलॉकिंग से सुसज्जित किए गए हैं। रेल ट्रैक की उपलब्धता की विद्युत पुष्टि के लिए 6,661 स्टेशनों पर पूर्ण ट्रैक सर्किटिंग भी लागू की गई है। उन्नत सुरक्षा तकनीक ‘कवच’ को राष्ट्रीय ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली के रूप में जुलाई 2020 में अपनाया गया था, जिसका विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। इसके संस्करण 4.0 को आरडीएसओ द्वारा 16 जुलाई 2024 को मंजूरी मिलने के बाद इसे दिल्ली–मुंबई के पलवल–मथुरा–कोटा–नागदा खंड तथा दिल्ली–हावड़ा के हावड़ा–बर्दवान खंड में सफलतापूर्वक लागू किया गया है। शेष मार्गों सहित कुल 15,512 किमी पर इसका कार्यान्वयन प्रगति पर है। सिग्नलिंग सुरक्षा को मजबूत करने हेतु अनिवार्य पत्राचार जांच, परिवर्तन कार्य प्रोटोकॉल एवं पूर्णता आरेखण से संबंधित विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं, साथ ही एस एंड टी उपकरणों के डिस्कनेक्शन–रिकनेक्शन के प्रोटोकॉल को भी सख़्ती से लागू किया गया है। सभी लोकोमोटिव में लोको पायलटों की सतर्कता बढ़ाने के लिए विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस लगाए गए हैं और कोहरा प्रभावित क्षेत्रों में सिग्नल दृश्यता बढ़ाने के लिए सिग्मा बोर्ड एवं चालक दल को जीपीएस आधारित कोहरा सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। ट्रैक संरचना को भी अधिक सुरक्षित बनाने के लिए 60 किलोग्राम, 90 यूटीएस रेल, प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट स्लीपर, फैन शेप्ड टर्नआउट तथा गर्डर पुलों पर स्टील चैनल/एच-बीम स्लीपर जैसी आधुनिक सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है। मानवीय त्रुटि को कम करने हेतु पीक्यूआरएस, टीआरटी, टी-28 जैसी आधुनिक ट्रैक मशीनों का प्रयोग कर मशीन आधारित ट्रैक बिछाने को बढ़ावा दिया गया है, साथ ही 130 मीटर और 260 मीटर लंबे रेल पैनलों की अधिकतम आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। रेल दोषों की समय पर पहचान हेतु अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन परीक्षण, ओएमएस एवं टीआरसी द्वारा ट्रैक ज्यामिति निगरानी, वेल्ड/रेल फ्रैक्चर की नियमित जांच, बेहतर वेल्डिंग तकनीक जैसी फ्लैश बट वेल्डिंग को अपनाना और टर्नआउट नवीनीकरण में थिक वेब स्विच तथा वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग का उपयोग किया जा रहा है। कार्यस्थल सुरक्षा, कॉरिडोर ब्लॉक, मानसूनी सावधानियों आदि पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। रेलवे कोचों तथा वैगनों का निवारक रखरखाव नियमित रूप से किया जाता है और पारंपरिक आईसीएफ कोचों को एलएचबी कोचों से प्रतिस्थापित किया जा रहा है। सभी मानवरहित लेवल क्रॉसिंग जनवरी 2019 तक हटा दी गई हैं। रेलवे पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण किए जाते हैं और आवश्यकता पड़ने पर मरम्मत एवं पुनर्वास कार्य किए जाते हैं। अग्नि सुरक्षा जागरूकता के तहत सभी कोचों में ‘अग्नि संबंधी नोटिस’ तथा सावधानियों से संबंधित पोस्टर लगाए गए हैं, जबकि नए कोचों में अग्नि पहचान एवं शमन प्रणालियाँ लगाई जा रही हैं और मौजूदा कोचों में इन्हें चरणबद्ध तरीके से जोड़ा जा रहा है। कर्मचारियों को सुरक्षित प्रक्रियाओं के पालन हेतु नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भारतीय रेल ने 30 नवंबर 2023 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से रोलिंग ब्लॉक प्रणाली को भी लागू किया है, जिसके तहत परिसंपत्तियों के एकीकृत रखरखाव और प्रतिस्थापन कार्यों को 52 सप्ताह पहले ही योजनाबद्ध कर सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जाता है।



























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