मानव सेवा का आधुनिक नवाबी दौर: समाजसेवी इमरान कुरैशी को ‘दानवीर हिंद’ सम्मान
अन्य खबरे Dec 07, 2025 at 06:50 PM , 180लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की मशहूर कहावत “जिसको न दे मौला, उसे दे आसफ़ुद्दौला” नवाबी दौर की दानशीलता और इंसानियत का प्रतीक रही है। इतिहास गवाह है कि 1784 के भयंकर सूखे में नवाब आसफ़ुद्दौला ने लोगों को काम और भोजन उपलब्ध कराने के लिए इमामबाड़े के निर्माण की शुरुआत की थी।
उसी जज़्बे और सेवा भाव को आज पुराने लखनऊ में अमन शांति समिति के अध्यक्ष इमरान कुरैशी अपने कार्यों से जीवित रखते दिखते हैं। इंसानियत की मदद की यह परंपरा सीमाओं से भी परे चली गई, जब नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान इमरान कुरैशी वहाँ पहुँचकर पहाड़ी क्षेत्रों में रह रहे लोगों को राशन, पानी और आवश्यक मदद उपलब्ध कराते रहे। उनके इस प्रयास को नेपाल में सम्मानित भी किया गया।
कोविड काल में भी इमरान कुरैशी और उनकी समिति ने राशन, पानी से लेकर चिकित्सा सुविधाओं तक हर संभव मदद उपलब्ध कराई। पंजाब की बाढ़ हो या हिमाचल की त्रासदी—अमन शांति समिति की मौजूदगी हर जगह दिखाई दी।
इन्हीं सेवाभावपूर्ण कार्यों को देखते हुए ऑल इंडिया न्यूज़पेपर एसोसिएशन (आईना) ने इमरान कुरैशी को ‘दानवीर हिंद’ के ख़िताब से सम्मानित किया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय वर्मा ने कहा कि कुरैशी वर्षों से जिस समर्पण के साथ मानवता की सेवा कर रहे हैं, वह प्रशंसनीय और प्रेरणादायक है।
प्रिंट मीडिया वर्किंग जर्नलिस्ट संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अज़ीज़ सिद्दीकी ने भी बताया कि इमरान कुरैशी सामाजिक मदद के साथ-साथ गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए गृहस्थी का सामान रियायती दरों पर उपलब्ध कराते हैं।
आईना के प्रदेश अध्यक्ष परमजीत ने कहा कि कुरैशी की सर्वधर्म सेवा—मोहर्रम के जुलूस से लेकर राम यात्रा तक—साम्प्रदायिक एकता की एक मिसाल है।
इस अवसर पर आईना के कई पदाधिकारियों ने फूलमाला पहनाकर कुरैशी का स्वागत किया। कार्यक्रम में इमरान कुरैशी ने घोषणा की कि अज़ीज़ सिद्दीकी को अमन शांति समिति का नया चेयरमैन बनाया गया है। साथ ही, जमील मालिक और शबाब नूर को मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया। आईना के सदस्यों ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ देते हुए उम्मीद जताई कि उनकी बदौलत समिति के कार्य और अधिक जन-जन तक पहुँच सकेंगे।





























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