क्या फायदा ब्रॉडगेज लाइन का ?

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के0के0 शुक्ला/ हरिशंकर मिश्र
लखीमपुर खीरी। लोगों के मन में धारणा थी कि ब्रॉड गेज लाइन बनने के बाद लखीमपुर गोला मैलानी पूरनपुर से भी देश में लंबी दूरी के लिए आम सुविधा बढ़ जाएगी और देश के पूरे रेलवे नेटवर्क से लखीमपुर पूरनपुर मैलानी भी जुड़ जाएगा लेकिन विगत लगभग एक दशक से ब्रॉड गेज लाइन के नाम पर जो रेलवे का इस रूट के निर्माण का ड्रामा चला जिससे इस रूट पर रेलगाड़ियों का सिस्टम लड़खड़ा गया वह लौटकर वापस पटरी पर आने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे के लोगों ने काफी तत्परता दिखाते हुए मेहनत करके लगभग 8 साल लगाकर पूरी लाइन को ब्रॉड गेज में परिवर्तित किया लेकिन उसके बाद भी जनता को उससे कोई लाभ नहीं हो पा रहा है बल्कि जो पीछे मीटर गेज के समय में जो रेलगाड़िया चल रही थी उसके बंद होने से क्षेत्रीय जनता और संकट में पड़ गई है और देश से जुड़ने का सपना लेकर जो  उत्साह लोगों के मन में था वह बिल्कुल धराशाई हो चुका है। (एक समय था जब इस मीटर गेज की लाइन से  लखनऊ कानपुर और जयपुर तक के लिए रेलगाड़िया चल रही थी लेकिन जैसे-जैसे मीटर गेज लाइन ब्रॉड गेज लाइन में परिवर्तित होती रही यह रूट भी छोटा होता गया) आमान परिवर्तन के बाद रेलवे अभी तक बरेली पीलीभीत मैलानी लखनऊ को ही रेल सेवा ठीक से जोड़ नहीं पाया है कभी-कभार लंबी दूरी की साप्ताहिक ट्रेन का संचालन कर जनता को एक झुनझुना सा पकड़ा दिया जाता है ताकि वह आश्वस्त रहे की बहुत जल्द ही इस पर लंबी दूरी की गाड़ियों का संचालन होगा लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर दिखाई दे रही है। जहां एक दिन में करीब दर्जनो पैसेंजर और एक्सप्रेस गाड़ियां इस रूट पर दौड़ती थी वर्तमान में एक भी गाड़ी दैनिक रूप से नहीं है। नाम मात्र की ट्रेने टुकड़ों में चलाकर रेलवे ने जनता की मुसीबत को और बढ़ा दिया है क्योंकि मीटर गेज के समय में लखनऊ बरेली सीधे जुड़ा हुआ था जहां से आप देश में कहीं भी आ जा सकते थे परंतु इस ब्रॉड गेज लाइन के बनने के बाद तो आप लखनऊ बरेली भी ठीक से नहीं जा सकते वहां के लिए भी रेलगाड़िया उल्टे सीधे समय से संचालित की जा रही है बल्कि बरेली के लिए आपको टुकड़ों में यात्रा करनी पड़ेगी। जिस कारण जनता को उसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है लोगों का मानना है कि मीटर गेज लाइन के समय रेल गाड़ियों का संचालन काफी हद तक ठीक होता था जिसका लाभ जनता उठाती थी परंतु जब से ब्रॉड गेज की लाइन बनी तब से तो ट्रेनों का ही अकाल पड़ा है जो चल रही हैं वह ऐसे समय से संचालित हो रही हैं जो की जनता के लिए हितकर नहीं है केवल कहने को कुछ ट्रेने डालकर अधिकारियों तथा रेलवे बोर्ड ने अपने कर्तव्य की इति श्री कर ली। रेलवे अभी तक इस रूट पर जितनी  ट्रेनों का संचालन हो रहा था उतनी भी रेलगाड़ियों का संचालन अभी तक नहीं कर पाया है अगर उतनी भी चला दे तो आम जनमानस को राहत मिल जाए मजे की बात यह है की रेलवे ब्रॉड गेज में होने के बाद अब अधिकांशतः ट्रेनों का संचालन डालीगंज से किया जा रहा है जबकि पहले ऐशबाग से हो रहा था बल्कि उससे भी पूर्व में चारबाग से संचालित की जा रही थी दूरी तय करने की टाइमिंग आने जाने की लगभग उतनी ही बनी हुई है उसमें भी कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ है। जनता तो इसमें कुछ कर नहीं सकती वह अधिकारियों और सरकार की मनमानी सहने को विवश है। हाल यह है कि बताते हैं विधानसभा चुनाव 2022 के समय के आसपास में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री द्वारा रेलवे के हवाले से आम जनता को यह जानकारी दी गई थी कि इस रूट पर लखनऊ से दिल्ली के लिए सीधे ट्रेन स्वीकृत कर दी गई है जिसका संचालन किया जाएगा यह बात दीगर है कि उस समय ब्रॉड गेज लाइन ही पूरी नहीं बन पाई थी अब यह लोगों ने समझा की लाइन फिट होने के बाद ट्रेन इस पर चलने लगेगी लेकिन अब जब पूरी लाइन फिट है तब टुकड़ों में रेलवे की गाड़ियों का संचालन भी हो रहा है अभी तक वह ट्रेन नहीं चल पाई है।

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