विवाद को खत्म करने के लिए मध्यस्थता से बेहतर कोई रास्ता नही है।

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष श्री सतीश महाना जी ने आज यहां विधि छात्र छात्राओं से  कहा कि किसी भी विवाद को खत्म करने के लिए मध्यस्थता से बेहतर कोई रास्ता नही है। आप सब जिस क्षेत्र में आ रहे हैं वहां धैर्य की बहुत जरूरत होती है। साथ ही यह भी कहा कि अगर अहंकार को अपने आप से दूर रखेंगे तो आपको बहुत अधिक सफलता मिलेगी।
श्री महाना देर शाम राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की विधिक सहायता समिति के तत्वावधान में 10 वे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता प्रतियोगिता के आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। 
तीन दिवसीय इस प्रतियोगिता के समापन समारोह में विधान सभा अध्यक्ष श्री सतीश महाना जी ने मीडियेशन ( मध्यस्थता) के लाभ बताए। उन्होंने कहा कि आप लोग जिस कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। वह कानून विधानसभा से ही पारित होता है। इस मौके पर उन्होंने छात्र छात्राओं को विधान सभा भ्रमण के लिए आमंत्रित किया। 
उल्लेखनीय है कि प्रतियोगिता दक्षिण एशिया के मध्यस्थता प्रतियोगिताओं में अग्रणी है, जिसका आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है। इस वर्ष प्रतियोगिता में विश्व के विभिन्न देशों के विश्वविद्यालयों एवं भारत के प्रमुख राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के द्वारा भाग लिया जा रहा है। प्रतियोगिता के मध्यस्थता प्रतियोगिता के आयोजन का उद्देश्य वाद एवं मुकदमों से हटकर  मध्यस्थता के माध्यम से विवाद को सुलझाना है, जिससे न्यायालयों पर बढ़ रहे मुकदमों के बोझ में कमी लाना एवं मुकदमों का सामयिक निवारण एवम मध्य मार्ग के रास्ते से समय एवं धन को बचाया जा सकता है।
प्रतियोगिता के सर्वोत्तम मध्यस्था राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय हैदराबाद रहे , सर्वश्रेष्ठ टीम राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय कोलकाता रहे एवं सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय टीम नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर रहे।
समापन समारोह में विश्वविधालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ संजय सिंह जी , टेंपल गार्डन ( ब्रिटिश लॉ फर्म) के पार्टनर श्री एंड्रयू मिलर (किंग्स काउंसल) जी,  श्रीमती कैथलीन रुआन लीडी जी, लीगल एड कमिटी के अध्यक्ष डॉ कुमार असकंद पाण्डेय जी, फैकल्टी कॉर्डिनेटर लीगल एड कमिटी श्री प्रेम कुमार गौतम जी, आशीष वर्मा , अभ्युदय जयसवाल, सुसांत वर्मा , अभिषेक कुमार , उत्कर्ष साहू , शगुन पाठक , सताक्षी आर्य , अर्पण कुशवाहा , वंश टंडन उपस्थित रहे।

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