प्रधानमंत्री को दीपक का खुला पत्र
जनपत की खबर Jan 21, 2024 at 12:23 PM , 290अब रामराज्य चाहिए यत्र तत्र सर्वत्र
आदरणीय प्रधानमंत्रीजी
भारतीय गणराज्य
सादर अभिवादन, जय सियाराम
महोदय,
प्रभु राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर दिए जाने वाले आपके संभाषण पर पूरे गणराज्य की दृष्टि है । इस संदर्भ में आग्रह है कि आप अपने संबोधन में कट्टरपंथियों और कृत्रिम लोगों द्वारा फैलाए जा रहे अनावश्यक व अतिरंजित विभ्रम को अवश्य दूर करेंगे जिनके कारण महान उदार भारतीय विरासत लांछित एवं कलंकित हो रही है । अपने भाषण में इन तथ्यों का समावेशन करेंगे तो निसंदेह राष्ट्रमन आह्लादित होगा ।
सर्वविदित है कि राम सबके हैं , किसी एक संप्रदाय के तो कदापि नहीं । राम के नाम पर सांप्रदायिक बातें करना अनुचित है । महामना तुलसीदास ने रामचरित मानस में जिस भाव से
सियाराममय सब जग जानी
करहु प्रणाम जोर जुग पानी
लिखा है, उसी सुभाव से बेकल उत्साही ने अपने को तुलसी का वंश बताते हुए लिखा है -
मैं तुलसी का वंश हूं , अवधपुरी है धाम
सांस सांस सीता बसी, रोम रोम में राम
अल्लामा इकबाल ने राम को इमामेहिंद घोषित करते हुए लिखा है कि
है राम के वजूद पर हिंदोस्तां को
नाज़
अहले नज़र समझते हैं उनको इमामे हिंद
एजाज इस चिरागे - हिदायत से है यही
रोशनतर अज़ सहर है ज़माने में शामे हिंद
रसखान - रहीम से लेकर आजादी के योद्धा हसरत मोहानी तक की कलम राम - कृष्ण के गीत गाती रही ।
महात्मा गांधी ने रामराज्य के स्वप्न को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा तो महान समाजवादी चिंतक राममनोहर लोहिया ने रामायण मेला और सीताराम राज्य की अवधारणा दी । अज्ञानतावश भी राम के नाम पर विद्वेष फैलाना अपराध है तो जानबूझकर स्वार्थवश यह कृत्य करना अपराध के साथ - साथ पाप भी है ।
श्रीमान , राम मंदिर पड़ाव अथवा सोपान हो सकता है , लक्ष्य तो वस्तुतः रामराज्य की स्थापना होना चाहिए जो समाजवाद के बिना संभव नहीं , तभी तो हनुमान भक्त चंद्रशेखर आजाद ने भगत सिंह सदृश क्रांतिकारियों के साथ मिलकर हिंदुस्तान समाजवादी गणतांत्रिक सेना का गठन स्वतंत्रता, गणतंत्र, रामराज्य व समाजवाद की प्राप्ति के लिए किया था । स्वतंत्रता १५ अगस्त १९४७ और गणतंत्र २६ जनवरी १९५० को अर्जित कर ली, समाजवाद और रामराज का स्वप्न अधूरा है ।
आदरणीय, राष्ट्र यह भी जानना चाहेगा कि वह दिन कब आएगा जब भारत में एक भी व्यक्ति बेरोजगार और भूखा नहीं होगा । समृद्धि आमजन तक समता के साथ मुस्कुराती मिलेगी । राष्ट्र चाहता है कि भारत अरबपतियों के मामले यदि तीसरे स्थान पर है तो प्रतिव्यक्ति आय के परिप्रेक्ष्य में भी शीर्ष दस( टॉप टेन ) देशों में विद्यमान हो । कब चिकित्सा व्यवस्था ऐसी होगी कि कोई अल्पमृत्यु का शिकार नहीं होगा ?
रामराज्य रूपी अच्छे दिन कब आएंगे ? । हम भारतीय गणराज्य के नागरिक वह रामराज्य चाहते हैं जिसे चित्रित करते हुए आदिकवि ने लिखा है -
नाधिव्याधिजराग्लानिदुःखशोक
भयक्लमा
मृत्युश्चनिछतां नासीद् राजन्योधोक्षजे
इसी चित्र को व्याख्यायित करते हुए मुनीश्रेष्ठ तुलसी ने मानस में लिखा है -
नहिं दरिद्र कोऊ दुखी न दीना
नहिं कोऊ अबुध न लच्छन हीना
बयरु न कर काहू सन कोई
राम प्रताप बिषमता खोई
दैहिक दैविक भौतिक तापा
राम राज काहुहि नहीं ब्यापा
सब नर करहि॔ परस्पर प्रीति
चलहिऺ स्वधर्म निरत श्रुति नीती
ऐसा रामराज्य भारत का महान लोकस्वप्न है, हम सभी उसके दृष्टा भी हैं और मुंतजिर भी.......
आपका
दीपक
एक नागरिक
भारतीय गणराज्य
अवलोकनार्थ - समस्त नागरिक गण
भारतीय गणराज्य































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