आई0आई0टी0 गुवाहाटी में मुख्य अभियंता यूपीआरआरडीए ने नयी तकनीक पर दिया व्याख्यान
अन्य खबरे Aug 04, 2023 at 07:17 PM , 190 लखनऊ 04 अगस्त, 2023। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी द्वारा शुक्रवार को ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से ग्रामीण सड़कों से जुड़े अभियंताओं के लिए गुवाहाटी में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में गांव की सड़कों को नयी तकनीक एफडीआर से बनाये जाने हेतु प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के मुख्य अभियंता श्री राज कुमार चौधरी को एफडीआर के विशिष्टियों पर विस्तृत व्याख्यान देने हेतु आमंत्रित किया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश-विदेश के विभिन्न अभियंताओं एवं वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिभाग करते हुए अपने अनुभवों को साझा किया गया।
मुख्य अभियंता श्री चौधरी द्वारा अपने व्याख्यान में एफडीआर के अनुभवों को साझा करते हुए बताया गया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत देश में पहली बार उत्तर प्रदेश में ग्रामीण सड़कों के निर्माण में एफडीआर तकनीक (फुल डेप्थ रीक्लेमेशन तकनीक) का प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से सड़क बनाने पर परम्परागत तकनीक की तुलना में एफडीआर तकनीक में 15 से 20 प्रतिशत कम लागत आती है। उन्होंने बताया कि इस नयी तकनीक के माध्यम से सड़क बनाने के पूर्व एफडीआर बेस को तैयार किया जाता है इसके उपरान्त सड़क का निर्माण तेजी से होता है। श्री चौधरी ने बताया कि एफडीआर तकनीक से सड़क बनने पर लागत कम होने के साथ ही मजबूत व टिकाऊ सड़क बनती है। मुख्य अभियंता ने व्याख्यान के दौरान बताया कि परम्परागत तकनीक से बनायी जाने वाली सड़कों की उम्र औसतन पांच वर्ष होती है जबकि एफडीआर तकनीक से बनी सड़क 10 वर्ष से पहले खराब नहीं होती।
श्री चौधरी ने बताया कि पुरानी सड़क को मशीनों से उखाड़कर उसे रीसाइकिल कर समतल किया जाता है तथा उसके उपरान्त सीमेंट व केमिकल के घोल को डाला जाता है फिर उसे रीसाइक्लर एवं मोटरग्रेडर से रोल करने के बाद पैडफुट रोलर और काम्पैक्टर से दबाया जाता है। इसके बाद सात दिनों तक पानी की तराई की जाती है और अंत में पेवर मशीन से बिटुमिन कंक्रीट बिछाकर उस पर रोलर चलाकर सड़क तैयार की जाती है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में काफी कम समय लगता है जिससे सड़कें तेजी से निर्मित होती हैं। श्री चौधरी ने बताया कि एफडीआर तकनीक से सड़क निर्माण करने पर 17 कि0मी0 सड़क के निर्माण में लगभग 55 हजार क्यूबिक मीटर गिट्टी बचती है जिससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है। एफडीआर तकनीक से सड़क निर्माण में कार्बन फुट प्रिंट में काफी कमी आती है।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 5392.65 किमी0 सड़क एफडीआर तकनीक से बनायी जा रही है। देश में पहली बार पीएमजीएसवाई के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश में एफडीआर तकनीक से सड़के बनायी जा रही हैं। देश के विभिन्न राज्यों यथा राजस्थान, बिहार, झारखण्ड, महाराष्ट्र, मेघालय, त्रिपुरा, आसामा, नागालैण्ड इत्यादि राज्यों से मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, अवर अभियंता तथा अन्य तकनीकी स्टाफ द्वारा यूपीआरआरडीए में एफडीआर तकनीक का प्रशिक्षण लिया गया है।



























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