अदभुत नदी : जिसके पानी में घुला है सोना

परिवेश , 744

हमारे देश में बहुत सारे रहस्यमय बातें मिलती हैं जिन पत विश्वास करना प्रायः मुश्किल होता है आज हम आपको एक ऐसी ही नदी के बारे में बताने जा रहे है जिसके पानी में सोना घुला है . छत्तीसगढ़ के कांकेर में एक पहाड़ी है,जिसका रहस्य आज तक सुलझ नहीं सका है. बस्तर संभाग के कांकेर जिले से 80 किमी दूर दुर्गूकोंदल ब्लाक के ग्राम लोहत्तर में एक पहाड़ी स्थित है,इस पहाड़ी में एक गुफा स्थित है ,जिसमे सोनदाई देवी का मंदिर है. सोनादाई पहाड़ी और गुफा अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए है.


बताया जाता है कि आज तक कोई भी सोनादाई गुफा की गहराई को नहीं माप सका है. इस गुफा के भीतर एक जलकुंड है. आसपास के करीब 300 से अधिक गांव के लोगो के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि इस जलकुंड के पानी से नहाने से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है. सोनादाई में प्रतिवर्ष माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि में विशाल मेला भी लगता है,इस दौरान पूरे छत्तीसगढ़ से लोग सोनादाई के दर्शन करने कांकेर पहुंचते हैं.

सोनादाई गुफा के जलकुंड का पानी एक नदी में जा कर मिलता है, माना जाता है कि सोनदाई की पहाड़ी से सोना निकलता है, जो नदी के पानी में जाकर मिल जाता है. आज भी कांकेर में बहने वाली कोटरी के संगम घाट में नदियों से सोने के छोटे छोटे कण मिलते हैं ,जिसे स्थानीय ग्रामीण बड़ी मेहनत से छानकर पानी से अलग करके बेच देते हैं. इस क्षेत्र में रहने वाली एक विशेष जाति "सोनझरिया समुदाय " के लोग कई पीढ़ियों से नदी से सोना निकालने का काम करते आ रहे हैं.
स्थानीय जनश्रुतियों के मुताबिक सैकड़ों साल पहले एक चरवाहा अपनी बकरी को चराने के लिए सोनादाई पहाड़ पहुंचा था. बकरी चराने के दौरान उसे एक चमकता हुआ पेड़ दिखाई दिया, उसने वह फूल तोड़कर अपनी बकरी को पहना दिया, जिसे स्थानीय राजा धर्मराज ने देखा. जब राजा ने पहाड़ी में जाकर चमकदार पेड़ देखा,तो वह हतप्रभ रह गया, क्योंकि वह सोने का पेड़ था.

राजा ने पेड़ को उखाड़ने के लिए के लिए 9 लाख मजदूरों की मदद से काफी दिनों तक खुदाई करवाई,लेकिन वह असफल रहा. कहते है कि खुदाई इतनी गहरी हो गई कि सारे मजदूर उसके भीतर ही दब गए,आखिर में राजा ने पेड़ ले जाने की अपनी जिद छोड़ दी.आज भी सोनादाई पहाड़ी में मजदूरों की बनाई पत्थर की दीवार टूटीफूटी अवस्था में देखी जा सकती है.
पुराने जानकार मानते हैं कि सोनादाईपहाडी में सोने का पेड़ होने की बात सुनकर अंग्रेजो ने भी उसे  खोजने की बहुत कोशिश  की  लेकिन असफल रहे. कहा जाता है भारतसरकार ने नब्बे की दशक में यहं सोना खोजने का सर्वे किया . लेकिन भारत सरकार भी इसमें असफल रही.. तमाम प्रयासों के बाद भी कोई सोनादाई में छिपे सोने के भण्डार को खोज नही सका . वही यह भी सच है काकेर के कई गावों में लोग नदियों सोना निकाल कर अपना  जीवन यापन कर रहे हैं.. कहा जाता है जब भी बारिश होती है गाँव वाले पहाड़ी से रिस कर नदी में घुल रहे पानी को छानकर उसमे से सोना निकालते है . गाँव वालों की मान्यता है यह सोना उन्हें उनकी इष्टदेवी सोनादाई के आशीर्वाद के चलते ही सिर्फ उन्हें ही मिलता है

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