दो और मुकदमों में दोषमुक्त हुए वीएम सिंह # बिजली चोरी के मामले में दर्ज थे मुकदमें
अन्य खबरे Jun 07, 2022 at 07:35 PM , 439पीलीभीत : किसान मजदूर संगठन के मुखिया वीएम सिंह को कथित बिजली चोरी के दो मामलों में साकेत कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया है। विधानसभा चुनाव के दौरान वर्ष 2002 में उनके खिलाफ दिल्ली में बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज किया गया था।20 अक्टूबर 2000 से मूल्य समर्थन योजना के तहत आंदोलन प्रदेश में पूरनपुर से किसान मजदूर संगठन के मुखिया वीएम सिंह के नेतृत्व में आरंभ हुआ। साथ साथ 9 नवम्बर 2000 को हाईकोर्ट के आदेश के तहत मूल्य समर्थन योजना पर धान मंडियों में खरीदने का आदेश ओर लगातार फरवरी 2001 तक कोर्ट द्वारा निगरानी करने से बहुत से लोग बौखला गए थे । इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 23 फरवरी 2001 को मूल्य समर्थन योजना खरीद की याचिका को खारिज कर दिया। वहीं 30 मार्च 2001 को वीएम सिंह के खिलाफ एक एफआईआर 66/2001 बिजली चोरी के आरोप में दर्ज की गई ।
वीएम सिंह किसी तरह के दबाव में नहीं आये और जुलाई 2001 में सुप्रीम कोर्ट में मूल्य समर्थन योजना को चालू करने की अपील डाली जिसकी पैरवी करते हुए 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने 23 फरवरी 2001 के फैसले को खारिज कर दिया जिससे अभी तक मूल्य समर्थन योजना पर कांटे लगते रहे । वहीं प्रदेश के और पीलीभीत के स्थानीय नेताओं को वीएम सिंह का व्यक्तित्व अखरता गया और जब वीएम सिंह ने फरवरी 2002 में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के उम्मीदवार तहत निर्दलीय पर्चा भरा तो वीएम सिंह पर दबाव डालने के लिए कि उन्हें पीलीभीत से चुनाव छोड़कर दिल्ली जाना पड़े। इसके लिए 28 जनवरी 2002 को फर्जी छापा दिखाते हुए एफआईआर संख्या 148/2000 दर्ज की जिससे पूरे चुनाव में गिरफ्तारी की तलवार वीएम सिंह पर लटकी रहे । याद रहे उस समय तत्कालीन सांसद और केंद्रीय मंत्री श्रीमती मेनका गांधी ने एक नई पार्टी शक्ति दल बनाई थी और वीएम सिंह को हरवाने के लिए एड़ी से छोटी तक का जोर लगा दिया । मंशा के तहत वीएम सिंह लगभग 6-7000 वोटों से भाजपा प्रत्याशी से चुनाव हारे ।
दोनों मुकदमों में तीन साल के बाद ही चार्जशीट फाइल की गई वो भी तब जब वीएम सिंह ने मार्च के पहले सप्ताह में पीलीभीत के लोकसभा चुनाव लड़ने का एलान किया । पीलीभीत से दिल्ली पहुंचते ही कुछ घण्टों में वीएम सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और 15 मार्च 2004 को कोर्ट द्वारा उनको 3,13,723 रुपया जमा कराने पर बेल मंजूर की गई । वीएम सिंह ने दोनों मुकदमों को चुनौती दी और उनसे वसूली की रकम को गैर कानूनी मानते खारिज करने की मांग की । इसी दरमियान 2005 का सूचना का अधिकार अधिनियम आया जिसके तहत वीएम सिंह ने सूचना मांगी की जहां बिजली विभाग ने छापा मारा और जिस जगह से वीएम सिंह बिजली चोरी की, उस जगह पर बिजली कब लगी थी ओर अगर नहीं लगी तो कब तक लगने की संभावना है । विभाग की तरफ से इसका उत्तर आया कि उस जगह बिजली कभी लगी ही नहीं ओर रोड़ पर बिजली के खम्बे लगाने का प्रस्ताव नगर निगम में लंबित है और जल्द लगने की संभावना है । इससे स्पष्ठ हो गया कि बिजली चोरी का मामला राजनीतिक था और वीएम सिंह पर इलेक्शन ओर किसानों की लड़ाई न लड़ने के लिए एक दबाव था।
दिल्ली की साकेत कोर्ट के एडिशनल जिला एवं सेशन जज अनिल कुमार ने वीएम सिंह से वसूली की बात को गलत मानते हुए अपना आर्डर ओर डिक्री 1/9/2018 को पारित की जिसमें स्पष्ठ किया गया कि बिजली का छापा गलत है इसलिए वसूली की रकम को खारिज कर दिया । ये तो दीवानी मुकदमा था अब एफआईआर को भी एडिशनल एवं सेसन जज ने 25 नवम्बर 2021 को फर्जी ओर गलत मानते हुए खारिज कर दिया और 26 मई 2022 को दिल्ली विद्युत बोर्ड को आदेश दिया कि वीएम सिंह द्वारा 3,13,723 को 6 फीसदी ब्याज सहित वीएम सिंह को लौटाया जाए । इस आदेश के बाद वीएम सिंह 2 और मामलों में 20 वर्षों के लंबे सँघर्ष के बाद दोषमुक्त पाए गए।
*** नैमिष प्रताप सिंह



























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