यूपी को बड़ी सौगात: कानपुर-कबरई के बीच बनेगा 7,145 करोड़ रुपये का हाईस्पीड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस कॉरिडोर, यात्रा समय 3.5 घंटे से घटकर होगा 1.5 घंटे

जनपत की खबर , 25

कानपुर-कबरई फोरलेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे को कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी सड़क परियोजना को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग (ओ) कार्यक्रम के तहत भोपाल-कानपुर आर्थिक गलियारे के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में 117.7 किलोमीटर लंबे कानपुर-कबरई एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण किया जाएगा।
इस परियोजना पर 7,145.14 करोड़ रुपये की अनुमानित पूंजी लागत आएगी। इसका निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा बीओटी (टोल) मॉडल पर कराया जाएगा। इसके साथ ही मौजूदा एनएच-34 के कानपुर-कबरई खंड का संचालन और रखरखाव भी किया जाएगा।
कानपुर से कबरई तक तेज और सुरक्षित सफर
यह नया हाईवे चार लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर होगा, जिसे भविष्य में छह लेन तक विस्तार योग्य बनाया जाएगा। इस मार्ग पर वाहनों की डिजाइन गति 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा रखी जाएगी।
परियोजना पूरी होने के बाद कानपुर और कबरई के बीच यात्रा का समय 3.5 घंटे से घटकर लगभग 1.5 घंटे रह जाएगा, जिससे करीब 58 प्रतिशत समय की बचत होगी। इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, ईंधन और वाहन संचालन लागत में कमी आएगी तथा यात्री और माल परिवहन को गति मिलेगी।
बुंदेलखंड के औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार
यह आर्थिक गलियारा उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को मध्य प्रदेश के खनिज, विनिर्माण और कृषि क्षेत्रों से जोड़ेगा। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में उद्योग, व्यापार और रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।
यह परियोजना एनएच-34, एनएच-35, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, कानपुर रिंग रोड और कई राज्य राजमार्गों से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। साथ ही कबरई के खनन क्षेत्र से खनिज, निर्माण सामग्री, औद्योगिक उत्पादों और कृषि उपज की आवाजाही आसान होगी।
पीएम गतिशक्ति के तहत 16 आर्थिक और 10 लॉजिस्टिक नोड जुड़ेंगे
परियोजना पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप विकसित की जाएगी। इससे उन्नाव, बंथर, पनकी, रनिया, जैनपुर, रूमा, चकेरी, सुमेरपुर और भूरागढ़ सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर संपर्क मिलेगा।
इसके अलावा फतेहपुर, महोबा जैसे सामाजिक और पर्यटन केंद्रों तथा कानपुर, घाटमपुर, हमीरपुर, महोबा, कबरई, भरुआ सुमेरपुर और बांदा जैसे लॉजिस्टिक केंद्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। कानपुर, चकेरी और खजुराहो एयरपोर्ट तक पहुंच भी आसान होगी।
निर्माण से मिलेगा 1.2 करोड़ मानव-दिवस रोजगार
केंद्र सरकार के अनुसार इस परियोजना के निर्माण के दौरान प्रति लेन प्रति किलोमीटर लगभग 11,188 प्रत्यक्ष और 13,985 अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार सृजित होंगे। अनुमान है कि पूरी परियोजना से करीब 1.2 करोड़ मानव-दिवस रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
वित्त वर्ष 2028 तक इस मार्ग पर औसत दैनिक यातायात लगभग 18,069 पैसेंजर कार यूनिट (PCU) तक पहुंचने का अनुमान है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच आर्थिक गतिविधियों, व्यापार और परिवहन नेटवर्क को नई गति देने वाली साबित होगी।

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