20वें सांख्यिकी दिवस पर डॉ. पी.के. मिश्रा का आह्वान: विकसित भारत की नींव विश्वसनीय आँकड़ों पर होगी
जनपत की खबर Jun 29, 2026 at 09:09 PM , 34नई दिल्ली। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने 20वें सांख्यिकी दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के सुशासन और ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश की विकास यात्रा विश्वसनीय, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी आँकड़ों पर आधारित होनी चाहिए।
डॉ. मिश्रा ने प्रोफेसर पी.सी. महालनोबिस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भारतीय सांख्यिकी प्रणाली के निर्माण में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत ने 1950 के दशक में दुनिया की बेहतरीन सर्वेक्षण आधारित सांख्यिकीय प्रणालियों में से एक विकसित की थी, जिसने वैश्विक स्तर पर नीति निर्माण को दिशा दी।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक आँकड़े आज भारत की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपदा हैं। डिजिटल परिवर्तन के कारण उपलब्ध विशाल डेटा भंडार का उपयोग बेहतर योजनाओं, लक्षित सेवा वितरण और समयबद्ध निर्णयों के लिए किया जाना चाहिए।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा सांख्यिकीय प्रणाली में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। जीडीपी, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों को नए आधार वर्ष के साथ अद्यतन किया जा रहा है, ताकि वे बदलती भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक सटीक रूप से दर्शा सकें।
उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण प्रक्रियाओं में कंप्यूटर आधारित व्यक्तिगत साक्षात्कार (CAPI), जिला स्तर के अनुमान, उच्च आवृत्ति सर्वेक्षण और डिजिटल डेटा प्लेटफॉर्म जैसी पहलें सांख्यिकीय व्यवस्था को आधुनिक बना रही हैं।
डॉ. मिश्रा ने डेटा की गुणवत्ता, गोपनीयता और स्वतंत्रता बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दौर में विश्वसनीय और मानकीकृत डेटा सेट नीति निर्माण के लिए आधार बनेंगे। उन्होंने कहा कि AI के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और पूर्वाग्रहों से बचाव के लिए मजबूत संस्थागत ढाँचे आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि ‘प्रशासनिक आँकड़ों की क्षमता का उपयोग’ इस वर्ष के सांख्यिकी दिवस का विषय देश की डेटा आधारित शासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
समापन में डॉ. पी.के. मिश्रा ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण ऐसे आँकड़ों पर निर्भर करेगा जो प्रत्येक नागरिक की वास्तविक स्थिति को दर्शाएँ और यह सुनिश्चित करें कि विकास की प्रक्रिया में कोई भी पीछे न छूटे। उन्होंने सांख्यिकी समुदाय के राष्ट्र निर्माण में योगदान की सराहना की।































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