महाकुंभ में गणतंत्र दिवस पर विशेष ड्रोन शो, आसमान में दिखा ’’मेरा संविधान-मेरा स्वाभिमान’’
अन्य खबरे Jan 27, 2025 at 05:57 PM , 179तीन दिनों तक लोगों ने आकाश में देखा समुद्र मंथन का जीवंत चित्रण
लखनऊ: 27 जनवरी 2025
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से महाकुंभ में आयोजित ड्रोन शो का समापन रविवार को गणतंत्र दिवस पर विशेष प्रस्तुति के साथ हुई। तीर्थराज प्रयाग में आयोजित तीन दिवसीय भव्य शो में श्रद्धालुओं ने आकाश में समुद्र मंथन का जीवंत चित्रण देखा। इस दौरान उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस और पर्यटन दिवस पर भी शानदार प्रस्तुति हुई।
यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि संगमनगरी में ड्रोन शो के तीसरे दिन का शुभारंभ ’’ऊँ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय’’ के साथ हुआ। समुद्र मंथन, महाकुंभ के बाद गणतंत्र दिवस पर विशेष प्रस्तुति हुई। बताया गया, कि 26 जनवरी 1950 वह दिन जब भारत ने गणतंत्र का गौरवमयी अध्याय लिखा और संविधान को अपनाया। हमारे दूरदर्शी संविधान ने एकता, न्याय और समानता के सिद्धांतों पर देश को मजबूत आधार दिया। यह सिर्फ कानूनों का संग्रह नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सपनों और आशाओं का जीवंत प्रतीक है। विचारों की विविधता और एकता के सूत्र में बंधा यह संविधान हमारी ताकत और हमारा अभिमान है।
श्री जयवीर सिंह ने बताया कि हम, भारत के लोग, आज अपने संविधान की मूल भावनाओं को पुनः प्रतिबद्ध करते हैं और यह संकल्प लेते हैं कि हम भारत की अखंडता, एकता, न्यायशीलता, समानता और बंधुत्व बनाए रखेंगे। सोने की चिड़िया कहलाने वाला भारत, आज फिर अपनी गौरवशाली पहचान को प्राप्त करने की राह पर है। विश्व की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में अपना स्थान बनाते हुए, भारत हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। हमारा गणतंत्र अनगिनत संघर्षों की कहानी है, जो समय की हर चुनौती के सामने अडिग और सशक्त रहा है। भारतीय गणराज्य की इस 76 वर्षीय यात्रा पर गर्व करते हुए, आइए हम अपने संविधान के मूलों को आधार बनाकर, भविष्य की ओर विश्वास और उत्साह के साथ कदम बढ़ाएं।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि हमारा प्रयास है कि महाकुम्भ में आने वाले श्रद्धालु विशिष्ट अनुभव लेकर लौटें। इसी उद्देश्य से भव्य ड्रोन शो का आयोजन किया गया। इसकी सराहना न केवल प्रदेश बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में हो रही है।



























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